क्या चलती का ही नाम है ज़िन्दगी फिर भी क्यों लगती ये इत्तेफ़ाक़ सी ! क्या चलती का ही नाम है ज़िन्दगी फिर भी क्यों लगती ये इत्तेफ़ाक़ सी !
उम्मीदें रूठ गई आरजू के किनारे बह गए, अपनों से दूरी हुई सब किनारे ढह गए। उम्मीदें रूठ गई आरजू के किनारे बह गए, अपनों से दूरी हुई सब किनारे ढह गए।
शायद ये इत्तेफाक है कि, मेरी नज़र से नज़र टकराके, चले जाते हो तुम। शायद ये इत्तेफाक है कि, मेरी नज़र से नज़र टकराके, चले जाते हो तुम।
हादसा था नज़र तुझसे मिलाना। तुख़म था नज़रे मिला कर डूब जाना। हादसा था नज़र तुझसे मिलाना। तुख़म था नज़रे मिला कर डूब जाना।
इतना भी ना स्वाद ले सारे मसाले भर मुठ्ठी में हम पर ही उड़ेल दे। आंखो में मिर्च की ज इतना भी ना स्वाद ले सारे मसाले भर मुठ्ठी में हम पर ही उड़ेल दे। आंखो मे...
क्यूँकि हर एक शख्स का कोई ठिकाना होता है। क्यूँकि हर एक शख्स का कोई ठिकाना होता है।